आतंक से आज सारी दुनिया परेशान है. अमेरिका जैसा शक्ति शाली देश भी इससे अछूता नहीं .यदि बारीकी से इस पर विचार करेंगे तो हम तह पाएंगे की कही न कही इसकी जड़ में अमेरिका की ही हथियार नीति ही है . जहा दो देश की लड़ाई की संभावना हो अमेरिका की मोजूदगी दिख जाती है /कोरिया ,वियतनाम ,अफगानिस्तान,भारत ,इराक ,जहा जहा भी लड़ाइयाँ हुई है अमेरिका मोजूद है ,हथियारों को बेचने के लिए तरह तरह की कुचालो का सहारा लेकर एक देश को उकसाना और हथियारों को बेचना मुख्य उद्देश्य है .पाकिस्तान की दुर्दशा सबसे बड़ा उदहारण है .अफगानिस्तान और रूस के खिलाफ अतंकवादियो का उपयोग कर जिस तरह तालिबान को पनपाया उसका परिणाम दुनिया देख रही है . जितनी सहायता और अस्त्र पकिस्तान को अमेरिका देता है उनका कही न कही भारत के विरोध में उपयोग होता है . अपनी व्यापारिक तथा दादगिरी की नीति से विश्व के विनाश और अशांति के लिए जवाब दारी तथा नतीजा भी अंततः भुगतना होगा .
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